महिलाओं को माहवारी क्‍यों आती है ?

हर महीने महिला का शरीर गर्भ की तैयारी करता हैः

  • उसके अंडाशय यानि ओवरी में एक अंडा तैयार होता है और उसके गर्भाशय की नलिका में पहुंच जाता है
  • साथ ही उसके गर्भाशय की अंदरूनी परत में खून जमा होता है ताकि अगर गर्भ बैठ जाए तो उस खून से बच्‍चा विकसित हो सके

अगर गर्भ नहीं बैठता तो यह परत टूट जाती है और उसमें जमा खून माहवारी के रूप में शरीर से बाहर आता है ।

हर महीने फिर गर्भ की तैयारी होती है और यही चक्र चलता है ।

अगर किसी माह गर्भ बैठ जाता है तो बच्‍चा गर्भाशय में पलने लगता है और इसीलिए माहवारी आना बंद हो जाती है ।

इस उदाहरण में, मासिक धर्म चक्र को चार चरणों में विभाजित है. 

माहवारी के दौरान सफाई रखने का महत्‍व

माहवारी महिलाओं के शरीर की एक सामान्‍य व महत्‍वपूर्ण प्रक्रिया है।

इस समय महिला के शरीर से रक्‍तस्राव होता है इसलिए शरीर की सफाई रखना बहुत जरूरी है ।

अगर महिलाएं माहवारी के दौरान सफाई रखें तो वे बहुत सी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं, जैसे जननांगों में संक्रमण से बच सकती है ।

माहवारी का खून शरीर के अंदर से साफ आता है पर बाहर आकर सफाई की कमी होने से गंदा हो जाता है ।

जैसे दूध ज्‍यादा देर तक बाहर रखने पर खराब हो जाता है, इसी प्रकार खून बाहर आने के बाद गंदे कपड़े के इस्‍तेमाल से या बहुत देर तक पैड/ कपड़ा न बदलने से सड़ने लगता है ।

सड़े हुए खून में कीटाणु जल्‍दी पनपते है जिनसे जननांगों में संक्रमण हो सकता है ।

ऐसा होने पर महिला को पेशाब में जलन, योनि मार्ग में खुजली, बदबूदार स्राव आना जैसी शिकायतें होती है ।

माहवारी की प्रक्रिया को हमारे समाज में बहुत सी गंदा एवं अपवित्र माना जाता है, इसके दौरान महिलाओं पर कई प्रकार की सामाजिक रोक टोक रहती है जैसे नहाने की मनाही ।

यह उचित नहीं है, यदि सफाई रखी जाये तो बहुत सी समस्‍याओं से बचा जा सकता है ।

माहवारी के दौरान सफ़ाई कैसे रखे

  • साफ पैड या सूती कपड़े का प्रयोग करें
  • एक पैड या कपड़े को बहुत देर तक प्रयोग न करें, उसे जल्‍दी-जल्‍दी बदले (दिन में तीन-चार बार)
  • गीले कपड़े का प्रयोग न करें, धूप में सूखा साफ धुला सूती कपड़ा ही प्रयोग करें
  • माहवारी के दौरान भी हर रोज जरूर नहायें व धुले हुए साफ कपड़े ही पहनें


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